Sunday, July 21, 2024
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Raisina Dialogue 2023: भारत की धरती पर रूस-यूक्रेन का मिलन, जानिए जी-20 की बैठक में बनी बात या वही युद्ध वाले हालात?

दिल्ली में रायसीना डायलॉग 2023 की बैठक हुई, जिसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान समेत कई देशों के विदेश मंत्रियों ने अपने विचार व्यक्त किए। एंटनी ब्लिंकन, एस जयशंकर, जापान के विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी योंग ने एक सेशन में एकसाथ हिस्सा लिया। इसमें तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई, जैसे एशिया प्रशांत क्षेत्र में चुनौतियों पर, रूस-यूक्रेन युद्ध पर और क्वॉड पर। लेकिन, सबसे हॉट टॉपिक रहा रूस-यूक्रेन युद्ध। चर्चा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को आड़े हाथों लिया और कहा कि रूस को रोकना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे दुनिया में गलत संदेश जा रहा है। एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि…

''इस युद्ध का असर पूरी दुनिया पर हो सकता है। अगर हम रूस को इस बात की छूट देते हैं कि वो यूक्रेन में जो कर रहा है, सही कर रहा है, तो ये दुनिया के सभी आक्रांताओं के लिए एक संदेश होगा कि वो भी ऐसा कर सकते हैं।''

हालांकि, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना डायलॉग में यूक्रेन युद्ध पर कुछ भी बोलने से परहेज़ किया। लेकिन, रायसीना डायलॉग 2023 के एक दूसरे सेशन में बातचीत के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावारोव ने अमेरिका और पश्चिमी देशों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। सर्गेई लावारोव ने कहा कि…

''हर कोई पूछ रहा है कि रूस बातचीत के लिए कब तैयार होगा। जबकि पश्चिमी देश कह रहे हैं बातचीत तब तक नहीं होगी जबतक यूक्रेन जंग के मैदान में जीत नहीं जाता। ज़ेलेंस्की से कोई नहीं पूछता कि वह कब बातचीत करने जा रहे हैं। पिछले साल सितंबर में ज़ेलेंस्की ने एक दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए, जिसके मुताबिक जब तक पुतिन मौजूद हैं, तब तक रूस के साथ बातचीत करना अपराध है।''

रूस के विदेश मंत्री ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वो दूसरे देशों में अपने हितों के लिए जंग को सही ठहराता है, लेकिन जब बात रूस की आती है तो मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाने के साथ शोर मचाने लगता है। खास बात ये रही कि सर्गेई लावारोव ने इस आरोप को जायज़ ठहराते हुए इराक से लेकर सीरिया, सर्बिया, अफगानिस्तान और यूगोस्लाविया तक का उदाहरण दे दिया। उन्होंने मॉडरेटर के एक सवाल पर कहा कि…

''क्या आपने इन वर्षों में ये जानने कि कोशिश की, कि इराक में क्या हो रहा है, अफगानिस्तान में क्या हो रहा है, क्या आपने अमेरिका और NATO से सवाल पूछा कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं, मैक्रो समेत तमाम नेता कहते हैं कि ये पहली बार है जब OSCE का उल्लंघन हुआ है, वो 1999 को भूल गए, जब सर्बिया पर बम गिराए गए थे, जब सीनेटर रहते हुए जो बाइडन ने कहा था कि एक साल पहले मैंने इस बॉम्बिंग को प्रपोज किया था। लेकिन वो हमसे ये उम्मीद करते हैं कि हम शांति का बम गिराए।''

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावारोव ने यूक्रेन के खिलाफ जंग को जायज़ ठहराते हुए कहा कि उनके देश को अपनी संप्रुभता की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि, अमेरिका को ये अधिकार है कि वो दुनिया के किसी भी कोने में हमले को अपनी सुरक्षा से जोड़कर जायज़ ठहरा सकता है, जैसा कि उसने इराक, सीरिया, यूगोस्लाविया, लीबिया, अटलांटिक महासागर के 10 हजार मील के दायरे में किया, लेकिन सवाल ये है कि क्या वो उनका अधिकार था।

रासयीना डायलॉग में QUAD के नाम पर भड़का रूस !

दिल्ली में हुए रायसीना डायलॉग की बैठक से पहले क्वॉड के सदस्य देशों यानि भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के विदेश मंत्रियों की भी बैठक हुई। इस बैठक में क्वॉड को मजबूत बनाने और आपसी सहयोग बढ़ाने को लेकर बातचीत हुई। इस बैठक के बाद चारों देशों के नेताओं ने रायसीना डायलॉग में एक साथ हिस्सा लिया और बताया कि कैसे क्वॉड क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में अहम किरदार अदा कर सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने क्वॉड के ताकतवर मुल्कों का संगठन बताया जो विश्व में शांति स्थापित करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि, क्वॉड एक फोर्स यानि ताकत है, जो अच्छे और सकारात्मक काम करने में जुटा है। ये कई तरीके से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि कोई देश अपने दम पर वैश्विक चुनौतियों से नहीं निपट सकता, फिर चाहे वो अमेरिका हो, भारत हो, जापान हो या फिर ऑस्ट्रेलिया, इसलिए एक राय रखने वाले देशों को एकसाथ आने की जरूरत होती है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि क्वाड कोई सैन्य संगठन नहीं है। जापान के विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी भी इससे इत्तेफाक रखते नज़र आए। जबकि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी कहा कि क्वॉड किसी भी देश के खिलाफ नहीं है। एस जयशंकर ने कहा कि…

''मेरा मानना है कि अगर आप एकमत हैं, आपकी मौजूदगी में मजबूती है तो हम किसी भी चीज़ के लिए एकसाथ खड़े हो सकते हैं। मैं इसे इस तरह से बिल्कुल परिभाषित होते नहीं देखना चाहूंगा कि आप किसी के खिलाफ खड़े हैं, क्योंकि इससे हमारी साख को नुकसान पहुंचेगा, ऐसा लगेगा कि दुनिया में दूसरा कोई है ही नहीं और हम किसी के पक्ष और विरोध में खड़े हैं।''

हालांकि, रायसीना डायलॉग के दौरान एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावारोव ने क्वॉड के गठन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि क्वॉड आर्थिक, सामाजिक सहयोग के लिए नहीं बनाया गया, बल्कि क्वॉड एक सैन्य संगठन है। उन्होंने कहा कि, अमेरिका क्वॉड का सैन्यकरण कर रहा है। वैसे रूस ही नहीं बल्कि चीन भी क्वॉड पर इसी तरह के आरोप लगाता आया है। चीन तो यहां तक आरोप लगा चुका है कि कि क्वॉड के ज़रिए उसे घेरने की कोशिश हो रही है।

चीन और भारत के संबंधों पर क्या बोले रूसी विदेश मंत्री ?

भारत अमेरिका और रूस के बीच अपना संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। तो वहीं रूस भी कुछ ऐसा ही कर रहा है। रूस, चीन और भारत के बीच अपना संतुलन बनाए रखना चाहता है। रूस नहीं चाहता कि उसके संबंध चीन या भारत, किसी से भी खराब हों। लिहाज़ा, रायसीना डायलॉग के दौरान जब सर्गेई लावारोव से इस बाबत सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि रूस और चीन की दोस्ती से भारत के साथ रूस के संबंधों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बल्कि रूस तो ये चाहता है कि भारत और चीन आपस में दोस्त बन जाएँ। लावारोव ने भारत और रूस की दोस्ती को खास बताया, और कहा कि हर क्षेत्र में भारत और रूस एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि…

''हम कभी भी किसी से दोस्ती किसी के खिलाफ जाकर नहीं करते। हमारे चीन के साथ बेहतरीन संबंध हैं, और उतने ही बेहतर संबंध भारत के साथ भी हैं। भारत के साथ संबंध तो आधिकारिक तौर पर हैं , और इससे जुड़े दस्तावेज़ों पर दोनों देशों के नेताओं ने साइन किए हैं, जिसमें एक दूसरे को विशेष रणनीतिक साझेदार की संज्ञा दी गई है। मुझे नहीं लगता है कि दुनिया के किन्हीं दो देशों के बीच इस तरह के आधिकारिक संबंध होंगे।''

रूसी विदेश मंत्री का ये बयान अपने आप बहुत मायने रखता हैं क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बावजूद भारत और रूस के संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ा। भारत ने कई मौकों पर रूस का साथ दिया। उसके खिलाफ लाए गए प्रस्तावों को खारिज किया। जबकि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार ये कहते भी नज़र आए कि युद्ध की जगह संवाद से का रास्ता अपनाना बेहतर है, जिसे रूस ने भी माना और कहा कि शांति बहाल करने के लिए किसी भी गंभीर प्रस्ताव का वो स्वागत करता है।

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