Saturday, April 18, 2026
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Iran-US Ceasefire: सीजफायर के समर्थन के साथ इजराइल की कड़ी शर्तें, हॉर्मुज खोलो, वरना…

ईरान और अमेरिका के बीच घोषित दो हफ्ते के युद्धविराम ने मिडिल ईस्ट को तनाव में कुछ राहत तो दी है (Iran America war ceasefire), मगर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बीच अब इज़रायल की ओर से इस पर पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है (Israel reaction on Iran US ceasefire)। इज़रायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के इस फैसले का समर्थन तो किया है (Netanyahu statement), लेकिन साफ कर दिया है कि यह समर्थन बिना शर्त नहीं है।

इजराइल की ये हैं कड़ी शर्ते

इज़रायल के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि वह अमेरिका के उस फैसले का स्वागत करता है, जिसमें ईरान के खिलाफ दो सप्ताह तक सैन्य कार्रवाई रोकने की बात कही गई है। हालांकि, इज़रायल ने इस समर्थन के साथ कुछ सख्त और स्पष्ट शर्तें भी जोड़ दी हैं (Iran US ceasefire Israel conditions explained), जो इस पूरे युद्धविराम को एक जटिल कूटनीतिक समीकरण में बदल देती हैं (Netanyahu reaction on Trump ceasefire decision)।

सबसे पहली और अहम शर्त है Strait of Hormuz को तुरंत खोलना। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है और यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है (Hormuz Strait importance in Iran conflict)। इज़रायल ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान इस मार्ग को बाधित करता है, तो युद्धविराम का कोई औचित्य नहीं रह जाता।इसके अलावा इज़रायल ने यह भी मांग रखी है कि ईरान तुरंत अमेरिका, इज़रायल और क्षेत्र के अन्य देशों पर सभी प्रकार के हमले बंद करे। इसमें सीधे सैन्य हमलों के साथ-साथ प्रॉक्सी समूहों के जरिए होने वाली गतिविधियां भी शामिल हैं। इज़रायल लंबे समय से ईरान पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाता रहा है।

बयान में यह भी कहा गया कि इज़रायल अमेरिका के उन प्रयासों के साथ खड़ा है, जिनका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार, बैलिस्टिक मिसाइल और आतंकवादी नेटवर्क के जरिए किसी भी देश के लिए खतरा न बने। यह बयान साफ तौर पर इज़रायल की सुरक्षा नीति और उसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

फाइल फोटो

“समझौते में लेबनान शामिल नहीं”

इस पूरे घटनाक्रम का एक और महत्वपूर्ण पहलू लेबनान को लेकर सामने आया है। इज़रायल ने स्पष्ट किया है कि यह युद्धविराम केवल अमेरिका और ईरान के बीच है और इसमें लेबनान शामिल नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ अंतरराष्ट्रीय हलकों, खासकर पाकिस्तानी मध्यस्थों की ओर से यह दावा किया जा रहा था कि लेबनान को भी इस समझौते में शामिल किया गया है। इज़रायल ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

अमेरिका ने इजराइल को दिलाया भरोसा

सूत्रों के अनुसार, Donald Trump द्वारा युद्धविराम की घोषणा के तुरंत बाद अमेरिका ने अपने करीबी सहयोगी इज़रायल को इसकी पूरी जानकारी दी। साथ ही यह भरोसा भी दिलाया गया कि आगामी कूटनीतिक वार्ताओं में इज़रायल और अन्य क्षेत्रीय सहयोगियों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी (Middle East latest geopolitical news)।

विश्लेषकों का मानना है कि यह दो सप्ताह का युद्धविराम अस्थायी राहत तो दे सकता है, लेकिन स्थायी शांति की राह अभी भी बेहद कठिन है। इज़रायल की सख्त शर्तें यह संकेत देती हैं कि यदि ईरान इन मांगों को पूरा नहीं करता, तो स्थिति फिर से विस्फोटक हो सकती है। मध्य पूर्व पहले ही कई दशकों से संघर्ष, राजनीतिक अस्थिरता और सैन्य टकराव का केंद्र रहा है। ऐसे में यह युद्धविराम एक उम्मीद जरूर जगाता है, लेकिन इज़रायल की स्पष्ट चेतावनी यह भी बताती है कि शांति की यह कोशिश बेहद नाजुक संतुलन पर टिकी हुई है।

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