नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद अब सड़कों से निकलकर संसद तक पहुंच गया है (NEET paper leak controversy) । कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोमवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के खिलाफ राज्यसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दाखिल कर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है (Jairam Ramesh privilege notice) । जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री ने संसदीय स्थायी समिति को लेकर अपमानजनक टिप्पणी कर संसद और उसकी समितियों की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने इसे ‘लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान’ और ‘संसद की अवमानना’ बताया।
क्या बोले थे धर्मेंद्र प्रधान?
पूरा विवाद उस बयान से शुरू हुआ, जिसमें NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले पर सवाल पूछे जाने पर धर्मेंद्र प्रधान ने संसदीय स्थायी समिति की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया था। प्रधान ने कहा था (Dharmendra Pradhan statement),
“मैं संसद की स्थायी समिति के रेड फ्लैग्स पर टिप्पणी नहीं करूंगा। मैं हाई लेवल कमेटी ऑफ एक्सपर्ट्स यानी राधाकृष्णन कमेटी की बात करूंगा। संसदीय समिति में विपक्ष के सदस्य होते हैं, वे चीजों को एक खास तरीके से लिखते हैं, यह आप भी जानते हैं।”
यही बयान अब सरकार और विपक्ष के बीच नए टकराव की वजह बन गया है।
जयराम रमेश का बड़ा आरोप
जयराम रमेश ने राज्यसभा के सभापति को भेजे नोटिस में कहा कि संसदीय समितियां “मिनी संसद” मानी जाती हैं और उनकी टिप्पणियों को इस तरह खारिज करना संसद की प्रतिष्ठा को कम करना है (Parliament controversy) । उन्होंने कहा कि मंत्री का बयान यह दिखाता है कि उन्हें संसद, संसदीय समितियों और लोकतांत्रिक जवाबदेही के प्रति सम्मान नहीं है। रमेश ने आरोप लगाया कि यह टिप्पणी समिति के सदस्यों की नीयत पर सवाल उठाने जैसी है, जो विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना की श्रेणी में आता है।
NEET पेपर लीक पर पहले से घिरी सरकार
NEET-UG 2026 परीक्षा पहले ही पेपर लीक के आरोपों को लेकर भारी विवाद में है। परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों छात्र और अभिभावक लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष सरकार पर परीक्षा प्रणाली को संभालने में विफल रहने का आरोप लगा रहा है। अब इस मुद्दे पर संसद के भीतर भी सियासी तूफान तेज हो गया है। विपक्ष इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला बताते हुए सरकार को घेरने की तैयारी में है।
21 जून को दोबारा परीक्षा
केंद्र सरकार ने NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को कराने का ऐलान किया है। इसके साथ ही शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा है कि अगले साल से परीक्षा पूरी तरह CBT यानी कंप्यूटर आधारित मोड में कराई जाएगी, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके। हालांकि विपक्ष का कहना है कि सिर्फ नई व्यवस्था का ऐलान काफी नहीं है, बल्कि सरकार को मौजूदा गड़बड़ियों की जवाबदेही भी तय करनी होगी।


