जंतर-मंतर पर जिस प्रदर्शन से CJP ने सरकार पर दबाव बनाया, जिस प्रदर्शन की वजह से अभिजीत दीपके और उनके साथियों का नाम पूरी दुनिया ने जाना, जिस प्रदर्शन की वजह से छात्रों को एक उम्मीद की किरण नजर आई, जिस प्रदर्शन की वजह से GEN-Z ने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मुनादी की। सवाल उठ रहे हैं कि क्या वही कॉकरोच जनता पार्टी अपने मुद्दों से भटक गई? सवाल उठ रहे हैं कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी दूसरे राजनीतिक दलों की राह पर चलने लगी? सवाल उठ रहे हैं कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी विपक्ष का टूलकिट बन गई? सवाल उठ रहे हैं कि क्या क़ॉकरोच जनता पार्टी सिलेक्टिव एजेंडे पर काम करती है?
कॉकरोच जनता पार्टी की नीयत पर सवाल क्यों?
कॉकरोच जनता पार्टी की नीयत पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि, झारखंड में स्टुडेंट्स अपनी मांगों को लेकर जहां प्रदर्शन की मशाल जलाए हुए हैं, वहीं कॉकरोच जनता पार्टी के तथाकथित छात्र नेता आराम फरमा रहे हैं। झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में हजारों छात्र पिछले कई दिनों से जोरदार और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में ये आंदोलन जारी है। लेकिन, गौर करने वाली बात ये है कि, इसमें जंतर-मंतर वाला कोई भी कॉकरोच नेता का हिस्सा लेने नहीं पहुंचा। सवाल उठे कि क्यों? तो अभिजीत दीपके ने कहा कि, वो अभी बीमारी से रिकवर कर रहे हैं, और उनके बाकी साथी जैसे आशुतोष रांका और सौरभ दास भी थके हुए हैं। कुल मिलाकर सब के सब एक महीने से ज्यादा चले आंदोलन की वजह से इतने थक गए हैं कि घर से बाहर निकल कर सड़क पर आंदोलन कर रहे छात्रों को अपना समर्थन नहीं दे सकते।
थके हुए CJP के नेता महाराष्ट्र क्यों गए?
जंतर-मंतर पर हाथ में हाथ डालकर सरकार को चुनौती देने वाला सारे कॉकरोच एक जगह जमा हो गए। जगह थी, संभाजीनगर स्थित अभिजीत दीपके का घर। आशुतोष रांका, सौरभ दास और रत्ना सिंह दिल्ली से अभिजीत दीपके के घर पहुंचे। अभिजीत दीपके का हाल चाल जानने के लिए नहीं, बल्कि CJP की अगली रणनीति का खाका तैयार करने के लिए। दीपके ने इसे नाम दिया कॉकरोच कॉनक्लेव, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी के सभी नेता एक दूसरे से मिले, चर्चा की, और आगे की अपनी रणनीति तैयार की। मेन स्ट्रीम मीडिया का ध्यान तो सिर्फ इस तरफ गया कि, अभिजीत दीपके और उनके साथी क्या नई पॉलिटिकल पार्टी बनाएंगे? क्या खुद को छात्रों का इनामदार समझने वाले अभिजीत दीपके राजनीति में कदम रखेंगे? किसी का ध्यान इस तरफ नहीं गया कि, झारखंड, पंजाब, केरल और कर्नाटक में पेपर लीक के साथ कथित गड़बड़ियों पर छात्र आंदोलन के पोस्टरबॉय की तरह बर्ताव कर रहे ये लोग कुछ क्यों नहीं बोल रहे? अभिजीत दीपके के पास लोग अपनी फरियाद लेकर तो आ रहे हैं, दीपके खुद को बड़े ओहदेदार की तरह दर्शा भी रहे हैं, लेकिन तीन राज्यों में पेपर लीक से जुड़े मामलों पर मौन क्यों हैं?
झारखंड में छात्र आंदोलन पर क्या बोले दीपके?
झारखंड में छात्र आंदोलन पर अभिजीत दीपके से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि, उनकी टीम रांची गई हुई है। वो भी जल्दी ही रांची जाएंगे। छात्रों से उनकी बातचीत हुई है। वो नैतिक समर्थन दे रहे हैं। लेकिन, आठ सेकेंड में बात खत्म, राफ-साफ, कट एंड क्लीयर… अभिजीत दीपके झारखंड भी जाएंगे, छात्रों का समर्थन भी करेंगे। लेकिन, कब, ये बाद में बताएंगे। शायद दीपके की टीम झारखंड तब जाएगी जब उसे लगेगा कि वहां से भी कुछ पॉलिटिकल माइलेज मिल सकता है। शायद सीजेपी के लोग झारखंड तब जाएंगे जब उन्हें लगेगा कि छात्रों के इस आंदोलन को हाईजैक करके अपनी वाहवाही करवाई जा सकती है? सोशल मीडिया पर लोग CJP को घेरते हुए ऐसे तमाम सवाल कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि, उनके पास झारखंड, पंजाब, केरल और कर्नाटक जाने का टाइम नहीं है, लेकिन कॉकरोच कॉनक्लेव करके आगे की रणनीति बनाने का पूरा टाइम है।
क्या विपक्ष के एजेंडे पर चल रही है CJP?
अभिजीत दीपके का मानना है कि भारत में पब्लिक मूवमेंट की जरूरत है। एक ऐसे प्रेशर ग्रुप की जरूरत है जो सरकार पर दबाव बनाने का काम करे। लेकिन, जिस तरह वो जूडिशियरी यानि न्यायपालिका तक पर सवाल उठा रहे हैं, एक तरह से भारत के लोकतंत्र पर सवाल उठा रहे हैं, भारत को ‘बनाना रिपब्लिक’ बताना चाह रहे हैं, उससे उनकी नीयत पर सवाल उठते हैं। सवाल इसलिए क्योंकि कॉकरोच जनता पार्टी को सिर्फ बीजेपी शासित राज्यों में कथित तौर पर गड़बड़ियां दिखती हैं, बाकी राज्यों में नहीं। जैसे पंजाब को मोहाली और पटियाला में छात्रों पर लाठीचार्ज हुई, सीजेपी ने कुछ नहीं कहा। कर्नाटक में छात्र प्रदर्शन पर बैठे, कांग्रेस अध्यक्ष के बेटे प्रियांक खरगे ने विवादित बयान दिया, अभिजीत दीपके, सौरभ दास, आशुतोष रांका… किसी ने कुछ नहीं कहा। झारखंड में छात्र पिछले दो हफ्तों से धरने पर बैठे हैं, कॉकरोच क़ॉनक्लेव कर रहा कोई कथित छात्र नेता रांची नहीं गया।
सोनम वांगचुक को मेंटोर क्यों बताया?
अभिजीत दीपके और सौरभ दास ने सोनम वांगचुक को अपना मेंटोर बताया। कहीं ना कही, CJP अब वांगचुक से दूरी बनाती दिख रही है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि, क्या कॉकरोच जनता पार्टी सियासी रास्ता चुनने वाली है? क्या कॉकरोच जनता पार्टी उस फॉर्मूले पर चलना चाहती है जिसपर चलते अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनाई? अन्ना आंदोलन से AAP अस्तित्व में आया, तो वहीं सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल से क्या CJP का राजनीतिक सफर शुरु होने वाला है?



