SC Order to remove encroachment from railway land in Banbhoolpura: उत्तराखंड के हल्द्वानी में बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने करीब 29 एकड़ रेलवे की जमीन से अवैध अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 19 मार्च के बाद सर्वे शुरु किया जाएगा। यह पता लगाने की कोशिश होगी कि 4500 परिवारों में से कितने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर पाने के हकदार है। अदालत में इस मामले को लेकर 55 मिनट तक सुनवाई चली। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के हर पहलू पर गंभीरता से विचार किया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि, रेलवे की ये जमीन सरकार की है और इसका इस्तेमाल करने का अधिकार सिर्फ सरकार का है।

अदालत ने ये भी कहा कि, कब्जा हटाने से प्रभावित परिवारों की पहचान आवश्यक है। बनभूलपुरा में रिहैबिलिटेशन सेंटर बनाए जाएंगे। गरीब या कम आय वाले परिवारों की पहचान कर उन्हें पुनर्वास योजना के तहत घर दिए जाने की प्रक्रिया भी तय की जाएगी। साथ ही प्रभावित लोगों को अगले छह महीने तक प्रति परिवार 2-2 हजार रुपए सहायता राशि दिए जाने का निर्देश भी दिया गया है।

CJI सूर्यकांत ने इस मामले पर क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि,“इसमें कोई शक नहीं कि ये सरकारी ज़मीन है और इसका इस्तेमाल तय करना राज्य का अधिकार है। मुद्दा बस इतना है कि वहाँ रहने वाले लोगों का पुनर्वास कैसे किया जाए ताकि जब उन्हें हटाया जाए, तो उन्हें उचित मदद मिल सके।” जस्टिस सूर्यकांत ने ये भी स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य सिर्फ अतिक्रमण हटाना नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास को सुनिश्चित करना भी है। वहीं सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि ये जमीन रेलवे की है और रेलवे को कई प्रोजेक्ट शुरू करने और बढ़ाने की आवश्यकता है। अतिक्रमण हटाने से इन प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और रेलवे की लाइनों के विस्तार के लिए आवश्यक स्थान सुनिश्चित होगा।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ?
गौरतलब है कि, गौरतलब है कि, हल्द्वानी हाईकोर्ट पहले ही कब्ज़ा हटाने का आदेश दे चुका था। प्रभावित लोगों ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जो पिछले दो साल से लंबित थी। अब सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश आया है, जिसका असर हज़ारों परिवारों के भविष्य पर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के लिए ज़मीन की वैधता और अतिक्रमण हटाने का अधिकार राज्य का है। वहीं प्रभावित लोगों के लिए पुनर्वास और आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जाएगी। हाईकोर्ट पहले ही कब्ज़ा हटाने का आदेश दे चुका था। प्रभावित लोगों ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जो पिछले दो साल से लंबित थी। अब सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश आया है, जिसका असर हज़ारों परिवारों के भविष्य पर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के लिए ज़मीन की वैधता और अतिक्रमण हटाने का अधिकार राज्य का है। वहीं प्रभावित लोगों के लिए पुनर्वास और आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जाएगी।



