Delhi: 12 अगस्त 2026 को एन. चंद्रशेखरन ने Tata Sons के चेयरमैन पद से हटने का ऐलान कर दिया। लेकिन एक महत्वपूर्ण बात ये है कि, उन्होंने तुरंत पद नहीं छोड़ा है। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक है और वे तब तक पद पर बने रहेंगे। असली विवाद सिर्फ चेयरमैन की कुर्सी का नहीं है, मामला उससे बड़ा है। Tata Trusts बनाम Tata Sons के बीच समूह की रणनीति और governance को लेकर तनाव बढ़ा है। इसमें Tata Sons की संभावित listing, बोर्ड में Trusts का प्रतिनिधित्व, Air India के प्रदर्शन और दूसरे रणनीतिक फैसले जैसे मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। इसलिए इसे साधारण “चंद्रशेखरन ने इस्तीफा दे दिया” कहना अधूरा होगा। ज्यादा सटीक तस्वीर यह है कि reappointment पर अंदरूनी सहमति नहीं बनी और उन्होंने तीसरा कार्यकाल मांगने के बजाय पद छोड़ने का फैसला किया।यह घटनाक्रम इसलिए भी बड़ा है क्योंकि चंद्रशेखरन ने 2017 में रतन टाटा के बाद Tata Sons की कमान संभाली थी और करीब नौ साल तक समूह का नेतृत्व किया।
इस्तीफे की असली वजह क्या है?
मुख्य वजह Tata Trusts और Tata Sons के बीच बढ़ता आंतरिक मतभेद बताया जा रहा है।
- Tata Trusts के पास Tata Sons में करीब 66% हिस्सेदारी है।
- Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए।
- चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्ति पर बोर्ड में सर्वसम्मति नहीं बन पाई।
- रिपोर्टों के मुताबिक, बोर्ड के एक सदस्य के विरोध के कारण उनकी reappointment को पूरा समर्थन नहीं मिला।
- इसके बाद चंद्रशेखरन ने खुद को दोबारा नियुक्ति के लिए पेश न करने का फैसला किया और बोर्ड से उत्तराधिकारी चुनने को कहा।
सबसे पहले समझिए Tata Sons क्या है?
Tata Sons पूरी Tata Group की मुख्य होल्डिंग कंपनी है। Tata Trusts के पास इसमें लगभग 66% हिस्सेदारी है। इसलिए Trusts का प्रभाव बहुत बड़ा है। इसमें दो प्रमुख किरदार हैं। N. Chandrasekaran — Tata Sons के Executive Chairman। वे प्रोफेशनल मैनेजर हैं और 2017 से Group की कमान संभाल रहे हैं। Noel Tata — Noel Tata, यानी Tata Trusts के चेयरमैन। रतन टाटा के निधन के बाद 2024 में उन्हें Trusts की कमान मिली है। यहीं से कहानी दिलचस्प होती है।
असली टकराव क्या था?
चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना था। सामान्य तौर पर उन्हें तीसरे कार्यकाल के लिए आगे बढ़ाए जाने की उम्मीद थी। लेकिन पिछले करीब छह महीनों से उनकी reappointment पर Tata Sons Board में सहमति नहीं बन पा रही थी। रिपोर्टों के मुताबिक Noel Tata की तरफ से भी उनके दोबारा नियुक्त होने को लेकर आपत्ति जताई जा रही थी। विवाद सिर्फ व्यक्ति का नहीं था, Tata Sons की भविष्य की रणनीति, Board में Trusts का प्रतिनिधित्व, Tata Sons की संभावित listing, Air India के प्रदर्शन और रणनीति और कुछ governance और shareholder मुद्दे प्रमुख हैं। यानी अंदर से Trusts और operating management के बीच power balance को लेकर तनाव था।
फिर चंद्रशेखरन ने क्या किया?
चंद्रशेखरन ने कहा कि लगातार यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि Board उनके reappointment को मंजूरी देगा या नहीं। इसलिए उन्होंने खुद को अगले कार्यकाल के लिए पेश नहीं करने का फैसला किया। उन्होंने आज (बुधवार) इस्तीफा दिया है, लेकिन वे तुरंत Tata Sons छोड़ नहीं रहे। वे अपना मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक पूरा करेंगे। 18 अगस्त को Tata Sons की AGM है। चंद्रशेखरन के Board में बने रहने को लेकर shareholder approval का मुद्दा भी सामने था। ऐसे में अगर उन्हें वोटिंग में पर्याप्त समर्थन नहीं मिलता, तो उनकी स्थिति और कमजोर हो सकती थी। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने ऐसी अनिश्चितता या संभावित सार्वजनिक टकराव से पहले खुद हटने का रास्ता चुना। लेकिन, बड़ा सवाल ये है कि, चंद्रशेखरन के बाद Tata Sons की कमान किसके हाथ जाएगी?



